उत्तर प्रदेश | फ़र्रूख़ाबाद

अध्यात्मिक विश्वविद्यालय नें दिया सच्ची शिवरात्रि मनाने का सन्देश l

  • कंपिल/फर्रुखाबाद मोहल्ला गंगा टोला में स्थिति अध्यात्मिक विश्वविद्यालय कंपिल में पत्रकार वार्ता के दौरान अध्यात्मिक विश्वविद्यालय की शिक्षिकाओं ने बताया जो शास्त्रों में भी आया है कंपिल के समान कोई दूसरा तीर्थ नगरी भूमंडल पर नहीं है ऐसा महान तीर्थ जहां पांडवों ने गुप्त वास किया वही भगवान भी गुप्त रूप से अपना कार्य कर रहे हैं, प्राचीन समय से ही भारत अध्यात्मिकता को महत्व दिया जा रहा है हम भी उसी अध्यात्मिकता को अपनाकर अपना जीवन उज्जवल बना रहे हैं महाशिवरात्रि पर्व पर आज जो हम जो मनाते हैं , बह शिव के अवतरण की ही तो यादगार हैं , भगवान शिव एसी घोर रात्रि में आकर के हमें ज्ञान की रोशनी देकर जगाते हैं, जिसकी यादगार में शिवरात्रि के दिन जागरण करते हैं अर्थात अज्ञान की नींद से जगाते हैं महाशिवरात्रि के दिन खास तीन पत्तों वाले बेलपत्र का महत्व होता है जिसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिमूर्ति शिव के 3 कार्यकर्ता ब्रह्मा विष्णु और शंकर की यादगार है इन्हें 33 कोटि देवताओं में सर्वोच्च तीन मूर्तियों द्वारा भगवान शिव प्रैक्टिकल में विश्व कल्याण हेतु कार्य कराते हैं अर्थात ब्रह्मा द्वारा देवी दुनिया की स्थापना, शंकर द्वारा पुरानी आसुरी दुनिया का विनाश और विष्णु द्वारा देवी दुनिया का पालना इस दिन मनुष्य उपवास करते हैं, उप माना नजदीक, वास माना बैठना , अर्थात प्रेम और श्रद्धा पूर्वक भगवान के निकट होना ही वास्तविक उपवास है भक्ति मार्ग में तो हम 1 दिन उपवास कर लेते हैं अर्थात एक दिन प्रेम से भक्ति पूजा पाठ कर उनके निकट रहते हैं, जिससे मन को कुछ क्षणों के लिए शांति की प्राप्ति हो जाती है यदि हम साकार हुए भगवान के वास्तविक स्वरूप का जान लेते हैं तो सदा काल भगवान के निकट रहकर अकूत सुख शांति की प्राप्त कर सकेंगे, जैसे हम अभी तक भगवान के प्रति जो बोलते आए हैं की ,तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा, हमें यहां भगवान के वास्तविक स्वरूप का पता चला है इसीलिए हम भगवान शिवरात्रि बनाते हैं आज संसार में विज्ञान की ताकत बढ़ने के बावजूदभी संसार में अशांति बढ़ रही है, आपसी मतभेद स्वार्थ के कारण देश आपस में युद्ध करने पर तुले हैं धर्मों में आपस में बैर भाव बढ़ता जा रहा है दहशत और आतंकवाद का खतरा सारे संसार के लिए बढ़ता जा रहा है ऐसी अशांत दुनिया को शांत बनाने के लिए ताकत एक ईश्वर के अलावा और किसी के पास नहीं है सारे संसार का पिता एक ईश्वर ही है उसे न जानने से आपस में लड़ कर हम सारे मनुष्य मात्र तनाव युक्त दुखी अशांत बन गए हैं अति साधारण साकार विश्व में आए हुए उस ईश्वर को पहचानने से ही आत्मा आत्मा ,भाई भाई ,यानी हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब मिलकर आपस में भाई भाई बनेंगे सृष्टि के एक पिता से ही वसुधैव कुटुंबकम की लहर भारत देश से शुरू होकर सारे विश्व में फैलेगी, पूरी बशुधा का एक पार्क्टिकल पिता होगा तब सारी वसुधा कुटुंब बनेगी हम सब मनुष्य आत्माओं का कर्तव्य है, अपने पिता को जानना ,उन्हें जाने बगैर किसी भी आत्मा को मुक्ति, जीवनमुक्ति नहीं मिल सकती है

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