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जनहित में सरकार को शिक्षा नीति और चिकित्सा नीति पर ध्यान देना चाहिए।

जनहित में सरकार को शिक्षा नीति और चिकित्सा नीति पर ध्यान देना चाहिए।


*जनहित में सरकार को शिक्षा नीति और चिकित्सा नीति पर ध्यान देना चाहिए।*

*हर वर्ष सरकारी टैक्स कर रहे चोरी।*

*दवाओं पर एमआरपी में बड़ा खेल।*

*प्रतिवर्ष स्कूलों में बदल देते हैं कोर्स।*

देश के अंदर जिस तरह से शिक्षा और चिकित्सा का में हिटलर साही का माहौल चल रहा है, उस पर न तो केंद्र सरकार कुछ कर रही और न ही प्रदेश की सरकारें इस ओर ध्यान दे रही।सरकारों को चाहिए कि वह देश के अंदर चलने वाली शिक्षा नीति और चिकित्सा नीति पर ध्यान देकर जनहित में प्रभावी कदम उठाकर देश की जनता के दर्द को समझने का प्रयास करे।
बताते चले कि देश अंदर बिकने वाली दवाईयों पर जो एमआरपी रेट पड़े होते हैं, वो दवाइयां मरीजों को एमआरपी रेट पर ही दी जाती हैं।जबकि वही दवा डॉक्टरों,फुटकर मेडिकल स्टोरों को 1/3 यानि कि तिहाई रेट पर दी जाती हैं।उदाहरण के तौर पर किसी इंजेक्शन की कीमत 3000(तीन हजार)रुपये है,जो कि दवाई के रैपर पर एमआरपी के रूप में दर्शाई गई है।मरीज को यह इसी रेट पर दिया जाता है।लेकिन ठीक इसके विपरीत ये इंजेक्शन सम्बंधित डॉ0एवं फुटकर मेडिकल स्टोर को एक तिहाई रेट कि 1000यानि कि हजार(एक हजार) पर उपलब्ध कराया जाता है। *इनमें मजबूर मरीजों का तो शोषण तो हो ही रहा है, बल्कि सरकार के भी टैक्स की बहुत बड़ी चोरी की जा रही है।* मैं स्वयं इसका भुक्तभोगी हूं।मेरे स्वयं के बेटे के एक इंजेक्शन दिन में दो बार लगना था जिसकी एमआरपी 3029 रुपया मेडिकल स्टोर पर बताई गई।लेकिन जब मैंने उसी इंजेक्शन को मंगवानें के लिए अपने परिचित डॉ0 को फोन से बताया तो वही इंजेक्शन मुझे 1100 ग्यारह सौ रुपये में दवा एजेंट द्वारा घर पर लाकर दिया गया।बड़े अफसोश की बात है, कि जो जनता देश की सरकार बनाने में अपने मताधिकार का प्रयोग कर ईमानदार सरकार बनाने में सहयोग करती है। *उसी सरकार के द्वारा उसका शोषण करने वालों का सहयोग किया जाने लगता है तब जनता का दर्द उभरने लगता है।* यही हाल देश के अंदर शिक्षा माफियाओं का हो रहा है।मैं जब पढ़ता था,तब जो कोर्स पढ़ाया जाता था,वह लगातार एक ही कोर्स बर्षो तक चलता रहता था।जब हम अगली कक्षा में प्रवेश करते थे तो उससे पहली कक्षा का कोर्स मुझसे छोटा भाई या बहन उसी कोर्स से पढ़ता था।वर्तमान शिक्षा नीति के आधार पर विभिन्न प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूलों के संचालकों ने शिक्षा को लूट का केंद्र बना लिया है। *हर स्कूल संचालक प्रतिवर्ष प्रकाशकों से मिलकर प्रत्येक क्लॉस के कोर्स को बदलकर बच्चों के अभिवावकों पर पैसों काअतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।* इसके अलावा मनमानी फीस भी इनमें बसूली जा रही है।यहाँ एक बात तो उजागर करना मेरा दायित्व बनताहै,जिसमें यह कटुसत्य है,*कि अमीरों पर इस शिक्षा नीति का और चिकित्सा नीति का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा,पर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के चक्कर मे मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज तक मे डूब रहे हैं।* देश के अंदर जिस तरह से शिक्षा नीति और चिकित्सा नीति हावी है, उससे जनता में त्राहि-त्राहि मची हुई है।पर इन धंधों में फलफूल रहे, माफियाओं के भय के कारण साथ ही सम्बंधित विभागों के उच्चाधिकारियों, विभागीय मंत्रियों को मिलने वाले सुविधा शुल्क और उनके द्वारा इन मामलों में सक्रिय चिकित्सा माफियाओं,शिक्षा माफ़ियायों को मिलने वाले सहयोग की बजह से जनता लगातार लुट रही है।वर्तमान में देश के ओजस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी तो ईमानदारी की प्रतिमूर्ति के रूप में विराजमान हैं,और हमेसा यही कहते हैं, कि देश की करोड़ों जनता का मैं सेवक हूँ, तो मेरा मोदी जी से निवेदन है, कि देश के अंदर जो शिक्षा नीति और चिकित्सा नीति घुन की तरह जनता का शोषण कर रही है, इन पर लगाम लगाते हुए जनहित में कठोर कार्यवाही करने के लिए प्रभावी कदम उठाये।ताकि इन शिक्षा माफियाओं और चिकित्सा माफियाओं के शोषण से देश की गरीब जनता को बचाया जा सके साथ ही सरकार को भी इनके द्वारा किए जा रहे टैक्स चोरी में लाभ मिले।

*लेखक -देवेंद्र शर्मा देवू*

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