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टीएमयू ने दिया हड्डी के चिकित्सकों को उड़ान का नया आसमां

TMU gave new hope to the orthopedic surgeons

06 मुरादाबाद (प्रो. श्याम सुंदर भाटिया) तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में आर्थो विभाग की ओर से आॅडी में आयोजित यूपीओए पीजीआईसीएल यानी साइंटिफिक प्रोग्राम मे यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा से आए आर्थाे के विद्वानों ने बोन कैंसर, बोन टीबी, नी इंजरी, कोहनी का टेढ़ापन, नर्व इंजरी, बच्चों की पैदाइशी अपंगता, कूल्हे का फ्रेक्चर, हड्डियों के आपरेशन, हड्डी में होने वाले इंफेक्शन जैसे सब्जेक्ट्स पर न केवल अपने अनुभव बताए बल्कि पीजी के 55 स्टुडेंट्स के लोंग केसों और शॉर्ट केसों का एक्जामिन भी किया।

दो दिनी यूपीओए पीजीआईसीएल का समापन

अंतत: केस प्रेजेंटेशन के लोंग केस एक्जामिन में रूहेलखंड मेडिकल कॉलेज, बरेली के डॉ. निशांत, एसजीआरआरआईएम एंड एचएस मेडिकल कॉलेज, देहरादून के डॉ. अर्पित शॉर्ट केस एक्जामिन में अव्वल रहे। इन दोनोें आर्थो के रेजिडेंट को प्रमाण पत्र और अवार्ड देकर पुरस्कृत किया गया। इस साइंटिफिक प्रोग्राम में सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट वितरित किए गए। आखिरी दिन दस नामचीन आथोर्पेडिसियन्स ने व्याख्यान दिए। हड्डी विशेषज्ञों ने सचेत किया कि हड्डी के आॅपरेशन के बाद रोगी को बेहद चौकन्ना रहने के जरूरत है क्योंकि रोगी की जरा-सी कोताही भी इंफेक्शन को आमंत्रित करने जैसा है। यदि इंफेक्शन हो भी जाए तो इलाज संभव है। एक आंकडा बताता है कि बोन टीबी में पचास फीसदी रोगियों में पॉट स्पाइन की शिकायत मिलती है। यदि इसके रोगी ने भी लापरवाही बरती तो लकवा होने का अंदेशा रहता है। यूपीओए पीजीआईसीएल के आगेर्नाइजिंग चेयरपर्सन एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय पंत और आगेर्नाइजिंग सेक्रेटरी एवं आर्थाेपेडिक्स के एचओडी डॉ. अमित सर्राफ ने साइंटिफिक प्रोग्राम को तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धि बताया। कुलाधिपति सुरेश जैन, गु्रप वाइस चेयरमैन मनीष जैन और एमजीबी अक्षत जैन ने शुक्रिया अदा करते हुए कहा, यूपीओए ने पीजीआईसीएल की मेजबानी का स्वर्णिम अवसर देकर टीएमयू मेडिकल कॉलेज को उड़ान के लिए नए पंख दिए हैं।

दस नामचीन आथोर्पेडिसियन्स ने दिए व्याख्यान

दूसरे दिन हड्डी के इंफेक्शन पर हेड आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के डॉ. सी. पी. पाल, इंफेक्टिड नॉन यूनियन पर प्रोफेसर हेड आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स श्री राममूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल कॉलेज, बरेली डॉ. संजय गुप्ता, रिसेंट एडवांसेज इन प्रोइस्थेटिक ज्वाइंट इंफेक्शन पर प्रोफेसर हेड आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स एसएचकेएम गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज नूह, हरियाणा के डॉ. सिद्धार्थ गोयल, एक्स-रे, सीटी स्कैन पर प्रोफेसर डिपार्टमेंट आफ रेडियोलॉजी टीएमयू के डॉ. अंकुर मल्होत्रा, एमआरआई एंड पेटस्कैन पर प्रोफेसर डिपार्टमेंट आफ रेडियोलॉजी डॉ. राजुल रस्तौगी, घुटने का परीक्षण पर प्रोफेसर एंड चेयरमेन आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स जेएन मेडिकल कॉलेज एएमयू अलीगढ के डॉ. अमीर बिन साबिर, बायोमेकेनिक्स आफ नी ज्वाइंट पर प्रोफेसर एंड हेड आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स हमदर्द इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइसेज एंड रिसर्च हमदर्द नगर, दिल्ली के डॉ. संदीप कुमार, अपोर्च टू एंग्यूलर डिफॉर्मेटिज नी ज्वाइंट पर प्रोफेसर एंड हेड आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज, फिरोजाबाद के डॉ. विपुल अग्रवाल, आर्थोसिस एंड पोस्थॉसिस पर प्रोफेसर हेड आफ डिपार्टमेंट आथोर्पेडिक्स एसएचकेएम गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज, नूह हरियाणा के डॉ. सिद्धार्थ गोयल, एडवांसेज इंन ट्रामा इंस्ट्रुमेंट्स इंप्लांट पर एसोसिएट प्रोफेसर डिपार्टमेंट आफ आथोर्पेडिक्स आरएमएल लखनऊ के डॉ. विनीत कुमार ने व्याख्यान दिए। टीएमयू के आर्थो विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रखर अग्रवाल ने बताया, अंतत: केस प्रेजेंटेशन के लोंग केस एक्जामिन में रूहेलखंड मेंडिकल कॉलेज, बरेली के डॉ. निशांत तो एसजीआरआरआईएम एंड एचएस मेडिकल कॉलेज, देहरादून के डॉ. अर्पित शॉर्ट केस एक्जामिन में अव्वल रहे। टीएमयू आथोर्पेडिक्स के पीजी छात्र डॉ. रजत खन्ना ने बताया, टीएमयू समेत यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड के 55 पीजी स्टुडेंट्स और नामचीन आथोर्पेडिसियन्स के बीच संवाद भी हुआ। दोनों दिन जाने-माने आथोर्पेडिसियन्स ने लोंग केसों और शॉर्ट केसों के एक्जामिन के बाद अपनी बहुमूल्य राय व्यक्त की।

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