फर्रुखाबाद

देश में कोरोना का कोहराम एक सौ पचास देशों की मदत करने बाली मोदी सरकार के पास शवों को जलने के लिए जगह तक नहीं वीस लाख करोड़ का पैकेज भी नाकाम

भारत देश में कोरोना की दूसरी लहर में हालात दिनों-दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। केंद्र व् राज्य के सरकारी दावे और चिकित्सा व्यवस्था की धज्जियां उड़तीं नजर आ रही है। कहीं लोग प्राणवायु ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ जरूरी दवाइयों और उपकरणों की कालाबाजारी हो रही है, और सर्कार कुछ नहीं कर प् रही है जिस पर सरकार और प्रशासन लगाम लगाने में नाकाम पूरी तरह नाकाम है। इसके परिणामस्वरुप कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। श्मशान घाटों में शवों के दाह संस्कार के लिए जगह कम पड़ गई है, लोगों को अपने सम्बन्धियों के शवों को जलाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। आइए हम आपको कुछ एक दो तस्वीर में श्मशान घाट का वो मंजर दिखाते हैं जो इंसान की रूह कोप कंपा देगा

कोरोना कल के संकट में हर कहीं ऑक्सीजन और बेड के लिए अस्पतालों के बाहर ही इंतजार नहीं देखा जा रहा है , बल्कि श्मशान घाटों में भी अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड रहा है। एक दो दिन तक लग जाते है दिल्ली के श्मशान घाटों पर 6-6, 12-12 घंटे की शवों की वेटिंग लगी है। श्मशान घाट छोटे पड़ने लग गए हैं । लोग आसपास की खाली जमीनों में अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। जहां पांच-छह अंतिम संस्कार होते थे, उस जगह एक दिन में 100 अंतिम संस्कार हो रहे हैं। दिल्ली के निगम बोध घाट पर पहले 36 शवों के अंतिम संस्कार की क्षमता थी लेकिन जैसे-जैसे शवों की तादाद बढ़ने लगी तो पार्किंग को भी बदल दिया गया है।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। इस महामारी से हजारों मरीजों की जान रोज जा रही है। कहीं ऑक्सीजन की कमी से तो कहीं, जीवन रक्षक दवाओं की कमी के कारण। अस्पतालों में जगह नहीं है। लोग आपदा को अवसर में वदल रहे हैं।

देश की स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शवों के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को 20-20 घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है।और लोग सड़कों पर मरने लगे हैं
श्मशान घाट के कर्मचारियों का कहना है कि ‘मैंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसी बुरी स्थिति नहीं देखी है । लोग अपने प्रियजनों के शवों के साथ एक जगह से दूसरे जगह भटक रहे हैं।’ दिल्ली समेत देश के कई शहरों के सभी श्मशान घाटों में शवों से बाढ़ सी आ गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस महीने दिल्ली में 3601 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। इनमें से पिछले सात दिनों में 2,267 लोगों जान गई है। ये सरकारी आंकड़े हैं। शहर को आतंकित कर रहे हैं और पीड़ा दे रही है। ऊपर से श्मशान घाटों के बाहर पोस्टर भी चिपका दिए हैं। जहाँ शवों को नहीं लिया जायेगा सरकारी व्यवस्था की नाकामी को चिढ़ा रहा है। पोस्टर पर लिखा है आज डेड बॉडी श्मशान घाट पर नहीं ली जाएगी ऐसे भी पोस्टर चिपका दिए गए हैं

रिश्तेदार शवों को लेकर श्मशान पहुंच रहे हैं और केवल उन्हें विदा कर रहे हैं। एक महिला श्मशान के बाहर अपने किसी प्रियजन के शवों को जलते देख रही है वहीं एक शव जलने के लिए इंतजार में पड़ा है। इससे बुरा दिन और नहीं हो सकता। मोदी सरकार व् दलाल मीडिया अब नहीं चिल्ला रही है न कुछ दिखाई दे रहा है।

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