फ़र्रूख़ाबाद

बीते दिन सड़क दुर्घटना में युवक की हुई मौत के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज परिजनों ने बीच चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद क्षेत्राधिकारी कायमगंज के हस्तक्षेप के बाद जाम खुल सका।

ब्यूरो रिपोर्ट नवाबगंज वीते दिन मीटिर रीडर की बाइकों की भिड़ंत में हो गयी थी मौत सीओ ने समझा बुझाकर खुलवाया जाम

ब्यूरो रिपोर्ट नवाबगंज
वीते दिन मीटिर रीडर की बाइकों की भिड़ंत में हो गयी थी मौत सीओ ने समझा बुझाकर खुलवाया जाम

बीते दिन सड़क दुर्घटना में युवक की हुई मौत के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज परिजनों ने बीच चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद क्षेत्राधिकारी कायमगंज के हस्तक्षेप के बाद जाम खुल सका।
जानकारी के अनुसार नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम रावत पट्टी निवासी रमन कुमार पुत्र श्री कृष्ण श्रीवास्तव उम्र 35 वर्ष की बीते दिन करनपुर पुठरी मार्ग पर बाइकों की भिड़ंत में मौत हो गई थी तथा दूसरा बाइक चालक विनीत कुमार पुत्र आशाराम निवासी हुसैनपुर रिश्तेदारी से लौटते समय रमन की वाईक से टक्करा गया। जिससे रमन की मौत हो गयी थी और विनीत घायल हो गया था। उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया। मौत की सूचना पर मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने मृतक के शव को सीएचसी भिजवाया। रात भर सब सीएचसी में रखे जाने के बावजूद सुबह 9.00 बजे तक पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई ना होने से परिजन आक्रोशित हो गये और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शव को उठाकर नवाबगंज चौराहे पर जाम लगा दिया।


जाम की सूचना पाते ही थानाध्यक्ष सत्य प्रकाश तथा नवाबगंज पुलिस मौके पर पहुंची और थानाध्यक्ष ने सूचना उच्चाधिकारियों को दी। क्षेत्राधिकारी कायमगंज सोहराब आलम ने डेढ़ घंटे बाद परिजनों को काफी समझा-बुझाकर जैसे तैसे जाम खुलवाया और पुलिस ने शव को अपनी सरकारी गाड़ी में रखकर लोहिया अस्पताल पहुंचाया। जहां पंचनामा की कार्यवाही की गयी। जाम खुलने के बाद एसडीएम कायमगंज मौके पर पहुंचे।
क्षेत्राधिकारी कायमगंज सोहराब आलम ने बताया कि मृतक के परिजनों को कुछ गलतफहमी हो गई थी, लेकिन उनकी ही तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत हुआ था। जिसमें बाइक का नंबर गलत छप गया था, लेकिन पीडि़त पिता श्री कृष्ण की तहरीर मिलने के बाद उनके मुकदमे में सुधार कर लिया जाएगा। फिलहाल आरोपी युवक पुलिस हिरासत में है। जिस पर मुकदमा दर्ज कर सुसंगत धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। तब कहीं जाकर परिजन शांत हुए और यातायात सुचारु हो सका।

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