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यूपी की गरीबी बनी विपक्षी दलों के लिए हथियार, अखिलेश यादव ने बताया शर्मनाक

UP's poverty has become a weapon for opposition parties, Akhilesh Yadav said shameful

28 नवंबर, लखनऊ: नीति आयोग की रिपोर्ट अब उत्तर प्रदेश के चुनाव में अहम हथियार बनने लगी है। विपक्षी दलों ने सत्ताधारी भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गरीब राज्य में तीसरा नंबर आने को यूपी के लिए शर्मनाक कीर्तिमान बताते हुए किसानों की आय दोगुनी करने के केंद्र व प्रदेश सरकार के दावे पर भी सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि राहुल गांधी भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेर चुके हैं।

यह कहा है अखिलेश यादव ने

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रविवार सुबह किए ट्वीट में कहा है कि ‘नीति आयोग के गरीबी पर आये रिजल्ट कार्ड में उप्र की भाजपा सरकार के राज में यूपी ने तीसरे सबसे गरीब राज्य होने का शर्मनाक कीर्तिमान बनाया है। उप्र को गरीबी में ढकेलने वाले क्या किसी की आय दुगुनी करेंगे। यही नारा आज का नहीं चाहिए भाजपा’। गौरतलब है कि चुनाव के वक्त नीति आयोग की रिपोर्ट विपक्षी दलों के लिए सरकार को घेरने का हथियार बन गई है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी लगातार प्रदेश की हालत में सुधार, व्यापार बढ़ने, विदेशी निवेश बढ़ने और रोजगार व नौकरी बढ़ने का दावा कर रहे हैं। राहुल गांधी ने साफ किया था कि सूचकांक में शामिल पांच सबसे गरीब राज्यों में चार में भाजपा की सरकार है जिसमें यूपी भी शामिल है।

गरीबी में यह है सूबे की स्थिति

नीति आयोग द्वारा जारी सूचकांक के अनुसार बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब है। यहां नीतीश कुमार की अगुवाई में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन की डेढ़ दशक पुरानी सरकार है, जबकि दिसंबर 2019 से पहले बीजेपी शासित ­ाारखंड में 42.16 प्रतिशत आबादी गरीब है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 37.79 प्रतिशत आबादी गरीबी में रह रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार यूपी की आबादी 19.98 करोड़ है, इसकी 37.79 फीसदी आबादी यानी 7.55 करोड़ आबादी गरीब है। बिहार की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 10.4 करोड़ है इसकी करीब 52 फीसदी आबादी यानी 5.4 करोड़ आबादी गरीबी में जीवन बसर कर रही है। इस सूचकांक में सीपीएम शासित केरल में 0.71 प्रतिशत, बीजेपी शासित गोवा में 3.76 प्रतिशत, सिक्किम में 3.82 प्रतिशत, तमिलनाडु में 4.89 प्रतिशत और पंजाब में 5.59 प्रतिशत आबादी गरीब है जोकि पूरे देश में सबसे कम गरीब जनता वाले राज्यों में शामिल हैं।

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