फ़र्रूख़ाबाद

संकिसा में पुरातत्व विभाग की सुरक्षित भूमि पर अशोक की लाट लगाकर शिवजी का मंदिर बनाए जाने से बौद्ध अनुयायियों में जबरदस्त रोष

शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल की है।

फर्रुखाबाद24webnews:-  संकिसा में पुरातत्व विभाग की सुरक्षित भूमि पर अशोक की लाट लगाकर शिवजी का मंदिर बनाए जाने से बौद्ध अनुयायियों में जबरदस्त रोष व्याप्त हो गया है। शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल की है। संकिसा बौद्ध स्तूप से पूरब की ओर करीब 500 मीटर दूरी पर करीब 2 बीघा पुरातत्व विभाग की भूमि है। इस भूमि पर अशोक की प्राचीन लाट लगी है वहां पर पुरातत्व विभाग का बोर्ड भी लगा है। पुरातत्व विभाग की भूमि से करीब 300 मीटर की दूरी पर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। यहां से करीब 50 मीटर दूरी पर छिछौनापुर गांव है। इलाके के लोग अशोक की लाट को शिवलिंग समझ कर महादेव का मंदिर के नाम से जानते हैं बीते दिनों अशोक की लाट उखाड़ कर काफी ऊंचा लंबा चौड़ा सीमेंटेड चबूतरा बनाया गया। चबूतरे के बीच में अशोक की लाट लगाकर टाइल्स भी लगाए गए चारों ओर बाउंड्री बनाकर लोहे का गेट भी लगाया गया है। महादेव का मंदिर दर्शाने के लिए शिवजी का त्रिशूल एवं भगवा झंडा झंडा लगाया गया है। पुरातत्व विभाग की जमीन पर जबरन मंदिर बनाए जाने की जानकारी होने पर पुरातत्व विभाग की जमीन पर जबरन मंदिर बनाए जाने की जानकारी होने पर संकिसा मुक्ति संघर्ष समिति के संयोजक कर्मवीर शाक्य ने भिक्षु कंचन बोधि भिक्षु धम्म मित्र को जानकारी के लिए मौके पर भेजा। भिक्षुओं ने मंदिर के फोटो खींचकर गांव वालों से जानकारी की। ग्रामीणों ने बताया गया कि संकिसा निवासी प्रधान विष्णु नारायण के प्रतिनिधि अतुल दीक्षित ने स्वयं खड़े होकर मंदिर का निर्माण कराया है। कर्मवीर शाक्य ने इस मामले की जानकारी क्षेत्राधिकारी कायमगंज को देकर कार्यवाही किए जाने की मांग की। सीओ के निर्देश पर थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक रामसेवक वर्मा ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की। एसएसआई रामसेवक वर्मा ने पूछे जाने पर एफबीडी न्यूज को बताया कि 3 दिन पूर्व पुरातत्व विभाग की भूमि पर मूर्ति लगाई गई है। बाद में श्री वर्मा ने बताया कि मूर्ति नहीं अशोक की लाट लगी है। वहां कोई झंडा नहीं लगा है और न ही बाउंड्री बनी है पुरातत्व के चौकीदार को इस निर्माण कार्य के बारे में जानकारी थी। चौकीदार ने पहले नहीं बताया आज बताया है जांच के दौरान पता चला कि संकिसा निवासी अमन दीक्षित ने निर्माण कराया है। फोन से संपर्क किए जाने पर अमन ने बताया कि मैंने निर्माण नहीं कराया है मैं इस समय दिल्ली में हूं। कर्मवीर शाक्य के अलावा संकिसा भिक्षु संघ एसोसिएशन के अध्यक्ष डा धम्भपाल थैरो समता विहार एवं बोधि पुस्तकालय के अध्यक्ष चेतसिक बोधि भिक्षु कंचन बोधि भिक्षु धम्म मित्र भिक्षु धम्म र्कीति वाईबीएस सेंटर के अध्यक्ष सुरेश शाक्य आदि ने पुरातत्व विभाग पर की जगह पर अवैध रूप से निर्माण कार्य कराए जाने की घोर निन्दा की है। उन्होंने जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक के साथ ही सूबे के मुख्यमंत्री एवं पुरातत्व विभाग के आला अधिकारियों से अवैध निर्माण को हटाकर एतिहासिक अशोक की लाट के साथ ही पुरातत्व विभाग की भूमि को सुरक्षित किए जाने की मांग की है। कर्मवीर शाक्य ने बताया कि अरहत भिक्षु सारपुत्र छिछौनापुर गांव में रुके थे। पुरातत्व विभाग की जमीन पर कंडे पाथे जाने की शिकायत की गई थी करीब 4 वर्ष पूर्व कानूनगो व लेखपाल ने पुरातत्व की जगह पर कंडे पाथने पर रोक लगा दी थी। पुरातत्व विभाग ने जमीन के चारों ओर कटीले तार लगवाये थे। संकिसा के प्रधान विष्णु दयाल के प्रतिनिधि अतुल दीक्षित ने बताया कि आज शाम थाने के एसएसआई जब जांच के लिए आए तब मंदिर के निर्माण की मुझे जानकारी हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि वहां पुरातत्व विभाग की जगह है जिस पर गलत ढंग से मंदिर का निर्माण कराया गया है। क्षेत्रीय लेखपाल हरमुख सिंह ने बताया कि मुझे इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने अतुल दीक्षित द्वारा भी जानकारी न दिए जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया है।

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