फ़र्रूख़ाबाद

2 अक्टूबर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर प्रधानाध्यापक द्वारा उल्टा झंडा फहराया

शमसाबाद फर्रुखाबाद 24webnews:-राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती का कार्यक्रम जो शमशाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में हर्षोल्लास के वातावरण जाने मैं जयंती मनाई गई। अलीपुर पीत धोलेश्वर  विद्यालय में जिस वक्त राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन मनाया जा रहा था उसी दौरान विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाध्यापक द्वारा राष्ट्रीय ध्वज उल्टा फहराया गया गलती से उल्टा ध्वज फहराया जो काफी देर तक लहराता रहा विद्यालय में महापुरुषों की जयंती का कार्यक्रम मनाया गया महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित माल्यार्पण किया गया साथ ही उपस्थित छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए इस दौरान इंचार्ज प्रधानाध्यापक द्वारा आजादी के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने संबंधी तमाम जानकारियों से अवगत कराया गया घंटो चलने वाले इस कार्यक्रम में इंचार्ज प्रधानाध्यापक द्वारा जो राष्टीय ध्वज फहराया गया था बो उल्टा लहराता रहा था हर किसी की नजर कार्यक्रम में थी लेकिन उल्टी लहरा रहे तिरंगे पर शायद किसी की नजर नहीं थी जब कुछ लोगों की नजर उल्टे उल्टे तिरंगे पर पड़ी तो तमाम लोगों की जुबान पर तमाम तरह की चर्चाएं आम हो गई क्या ध्वजारोहण के समय इंचार्ज प्रधानाध्यापक द्वारा ध्यान नहीं दिया गया क्या उल्टा फहराया गया तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं इस संबंध में जब इंचार्ज प्रधानाध्यापक नगमा सिद्दीकी से फोन द्वारा संपर्क किया गया मगर उनका फोन नहीं उठा था एक अन्य समाचार के अनुसार ब्लॉक संसाधन केंद्र शमशाबाद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय उलियापुर चंपत पुर जहां रविवार को विद्यालय के गेट पर छात्रों को शिक्षकों के आने का इंतजार करते हुए देखा गया विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र सूरज ने बताया विद्यालय में मनाई जाने वाली गांधी जयंती में भाग लेने के लिए सहपाठी साथियों के साथ आया था मगर शिक्षक नही आये ग्रामीणों ने बताया बड़ी लापरवाही है परिषदीय विद्यालयो में जहां एक ओर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा देश के पूर्व द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन मनाया जा रहा है वहीं इस विद्यालय में तालाबंदी देखी गयी आखिर बिद्यालय क्यो नहीं खुला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती का कार्यक्रम क्यों नहीं मनाया गया यह तो शिक्षक जाने फिलहाल इंतजार के बाद मायूस छात्र वापस घर लौट गए।

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