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कोलकातापश्चिम बंगाल

West Bengal: ममता बनर्जी सरकार का विस्तार भाजपा को चुनौती देने की भरपूर कोशिश बाबुल सुप्रियो को बीजेपी छोड़ने का तोहफा

ममता बनर्जी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। 14 महीने के अंदर ममता सरकार का ये दूसरा कैबिनेट का विस्तार है। मंत्रिमंडल में नौ नए मंत्रियों को राज्यपाल एल गणेशन ने राजभवन में शपथ दिलाई। इसमें सात कैबिनेट और दो स्वतंत्र प्रभाव मंत्री बनाए गए हैं।

 

ममता के नए मंत्रिमंडल में भाजपा छोड़कर टीएमसी में आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को भी जगह दी गई है। एक वक्त था जब पश्चिम बंगाल में बाबुल सुप्रियो भाजपा के पोस्टर बॉय हुआ करते थे। मतलब बंगाल में लगने वाले भाजपा के हर पोस्टर में बाबुल की फोटो जरूर हुआ करती थी।

इससे राजनीतिक गलियारे में काफी चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। कहा जाने लगा है कि लोकसभा चुनाव के लिए टीएमसी अभी से तैयारी में जुट गई है। नया मंत्रिमंडल इसी तैयारी का एक बड़ा हिस्सा है। आइए समझते हैं कैसे…?

पहले जानिए किन्हें मंत्री बनाया गया
कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र प्रभार

1-बाबुल सुप्रियो ,

2-बीरबाहा हंसदा
3-स्नेहाशीष चक्रबर्ती ,

4-बिप्लब रॉय चौधरी

5-पार्थ भौमिक
6-उदयन गुहा
7-प्रदीप मजूमदार
8-तजमुल हुसैन
9-सत्यजीत बर्मन

नौ नए मंत्रियों के जरिए ममता ने भाजपा के लिए रचा बड़ा चक्रव्यूह, BJP के पोस्टर बॉय भी बने मंत्रीपश्चिम बंगाल की सियास

पश्चिम बंगाल की सियासत से खुला संदेश
ममता बनर्जी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। 14 महीने के अंदर ममता सरकार का ये दूसरा कैबिनेट का विस्तार है। मंत्रिमंडल में नौ नए मंत्रियों को राज्यपाल एल गणेशन ने राजभवन में शपथ दिलाई। इसमें सात कैबिनेट और दो स्वतंत्र प्रभाव मंत्री बनाए गए हैं।

ममता के नए मंत्रिमंडल में भाजपा छोड़कर टीएमसी में आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को भी जगह दी गई है। एक वक्त था जब पश्चिम बंगाल में बाबुल सुप्रियो भाजपा के पोस्टर बॉय हुआ करते थे। मतलब बंगाल में लगने वाले भाजपा के हर पोस्टर में बाबुल की फोटो जरूर हुआ करती थी। अब वही सुप्रियो ममता सरकार में मंत्री बना दिए गए हैं। अन्य मंत्री भी ऐसे बनाए गए हैं, जिनसे आने वाले दिनों में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

इससे राजनीतिक गलियारे में काफी चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। कहा जाने लगा है कि लोकसभा चुनाव के लिए टीएमसी अभी से तैयारी में जुट गई है। नया मंत्रिमंडल इसी तैयारी का एक बड़ा हिस्सा है। आइए समझते हैं कैसे…?

 

पहले जानिए किन्हें मंत्री बनाया गया
कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र प्रभार
बाबुल सुप्रियो बीरबाहा हंसदा
स्नेहाशीष चक्रबर्ती बिप्लब रॉय चौधरी
पार्थ भौमिक
उदयन गुहा
प्रदीप मजूमदार
तजमुल हु

बैंक कर्मचारी से केंद्रीय मंत्री और अब ममता के मंत्री बने बाबुल का राजनीतिक सफर

बाबुल सुप्रियो यानी सुप्रिया बराल का जन्म 1970 में पश्चिम बंगाल के उत्तर पारा में हुआ। बाबुल ने अपने कॅरियर की शुरुआत एक बैंक कर्मचारी के तौर पर की थी। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी पहचान बनाई। प्लेबैक सिंगर के तौर पर नाम कमाने के बाद बाबुल ने राजनीति में कदम रखा। योग गुरु बाबा रामदेव के कहने पर वह 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के लिए उन्होंने खूब प्रचार किया।

खुद टीएमसी की कद्दावर नेता डोला सेन को लोकसभा चुनाव में हरा दिया। पहली बार सांसद चुने गए बाबुल को मोदी सरकार में मंत्री पद की जगह दी गई। 2019 में बाबुल ने फिर से टीएमसी की मुनमुन सेन को हराया। फिर बाबुल को केंद्र राज्य मंत्री बनाया गया।

भाजपा के खिलाफ बड़ा चक्रव्यूह रच रही हैं ममता बनर्जी

एक  वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, ‘ममता बनर्जी के सभी नौ नए मंत्री भाजपा की जीती हुई संसदीय क्षेत्र से आते हैं। ये अपने आप में एक बड़ा दांव है। ममता ने उन्हीं क्षेत्रों के विधायकों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है, जहां भाजपा मजबूत है। ये एक बड़ा संदेश है। ममता 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहीं हैं।’

 

 

‘ममता ने केवल इन्हें मंत्री नहीं बनाया है, बल्कि इन्हें नौ संसदीय सीटों की जिम्मेदारी भी दी है। इन मंत्रियों से साफ कहा गया है कि कुछ भी करके वह क्षेत्र में भाजपा का वर्चस्व कम करें ताकि 2024 में टीएमसी इन सीटों को वापस जीत सके। और भाजपा को चुनौती दे सकें ।

ममता के नौ मंत्री और सभी के जरिए भाजपा पर निशाना साधा

बाबुल सुप्रियो का समीकरण तो आपने समझ लिया। अब बाकी नए मंत्रियों का गणित भी समझ लीजिए। ममता का हर नया मंत्री चुन-चुनकर बनाया गया है।

1. ममता ने अपने मंत्रिमंडल में स्नेहाशीष चक्रबर्ती को भी शामिल किया है। स्नेहाशीष हुगली के जंगीपारा से विधायक हैं। ये विधानसभा हुगली संसदीय सीट के अंतर्गत आती है। हुगली से 2019 में भाजपा की उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी ने लोकसभा का चुनाव जीता था।

2. ममता के दूसरे मंत्री पार्थ भौमिक हैं। पार्थ नईहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। ये विधानसभा बैरकपुर संसदीय क्षेत्र में आती है। यहां से 2019 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अर्जुन सिंह ने चुनाव जीता था।

3. मंत्रिमंडल विस्तार में उदयन गुहा को भी मंत्री बनाया गया है। गुहा दीनहाता विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। यह क्षेत्र कूच बिहार संसदीय क्षेत्र में आता है। 2019 लोकसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के निसिथ प्रमाणिक सांसद चुने गए थे।

4. अब बात करते हैं ममता सरकार के अगले नए मंत्री प्रदीप मजूमदार की। प्रदीप दुर्गापुर पूर्व विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। ये सीट बर्दवान दुर्गापुर संसदीय क्षेत्र में आती है। यहां से 2019 लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के एसएस अहलूवालिया ने जीता था।

5. तजमुल हुसैन को भी ममता सरकार में मंत्री बनाया गया है। हुसैन हरीशचंद्रपुर विधानसभा से विधायक चुने गए हैं। ये सीट मालदा उत्तर संसदीय क्षेत्र में आती है। यहां से 2019 लोकसभा चुनाव में खगेन मुर्मू ने जीत हासिल की थी। खगेन भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं।

6. ममता के नए कैबिनेट मंत्रियों में आखिरी नाम सत्यजीत बर्मन का आता है। सत्यजीत बर्मन हेमताबाद विधानसभा से विधायक चुने गए हैं। ये विधानसभा सीट रायगंज लोकसभा क्षेत्र में आती है। यहां से 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा की देबोश्री चौधरी ने जीत हासिल की थी।

7. ममता का दांव केवल कैबिनेट मंत्रियों को लेकर नहीं है, बल्कि स्वतंत्र प्रभार के मंत्रियों को भी उसी उद्देश्य के साथ बनाया गया है। ममता के नए मंत्रिमंडल में बीरबाहा हंसदा को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है। हंसदा बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री रह चुकी हैं। अभी झारग्राम से विधायक हैं। हंसदा की सीट झारग्राम संसदीय क्षेत्र में आती है। 2019 लोकसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के कुंवर हेम्ब्रम ने जीत हासिल की थी।

8. ममता के अगले स्वतंत्र प्रभार मंत्री बिप्लब रॉय चौधरी हैं। चौधरी पंसकुरा पूर्ब विधानसभा सीट से विधायक हैं। ये सीट तामलुक संसदीय क्षेत्र में आती है। यहां से भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता शुभेंदू अधिकारी के भाई दिव्येंदू अधिकारी 2019 में सांसद चुने गए थे। यूं तो दिव्येंदू अभी भी तृणमूल कांग्रेस में ही हैं, लेकिन सियासी गलियारे में चर्चा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। ममता भी अब उन्हें दोबारा मौका नहीं देना चाहती हैं। ऐसे में ममता ने अभी से दिव्येंदु का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही इलाके में टीएमसी को मजबूत करने के लिए बिप्लब को मंत्री पद दे दिया।

 

 

 

 

 

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