Lucknow | उत्तर प्रदेश

अभेद्य किला है मायावती की बसपा जिसे भेदना मुश्किल ही नहीं न मुमकिन है ,जाते- जाते सभी विपक्षियों को सावधान कर गया नीला शैलाव

Lucknow:न सत्ता न बसपा ने कराया कार्य कर्ताओं को कोई साधन मुहैया सिर्फ आदेश मात्र से हुई लाखों की भीड़ इस बात का जीता जगता उदहारण है की मायावती की बसपा आज भी प्रदेश में एक ऐसा किला है जिसका मुकाबला विपक्षी हो या दुश्मन कभी बरावरी नहीं कर सकता नौ अक्टूबर कांसीराम के पन्द्रहवें परिनिर्माण दिवस पर हुई मायावती की ये अघोषित रैली ने विपक्षियों के होस उदा दिए हैं । भीड़ देखकर मायावती ने भी विरोधियों पर जमकर वार किया ,मंच पर मायावती की एन्ट्री देखने के लिए उनके समर्थक बेताब दिखे जैसे ही मायावती की एन्ट्री हुई जय भीम, मान्यवर कांसीराम अमर रहे ,व् बहन जी जिन्दावाद से कांसीराम ECO गार्डन पार्क के आलावा आसपास के इलाके भी गूंजने लगे

का चुनावी फार्मूला भी किया साफ़ ब्राहमण ,मुश्लिम ,दलित के साथ पिछड़ा व् अन्य पिछड़ा वर्ग भी बनेगा भागीदार

कांशीराम की पुण्यतिथि पर हुई रैली में बसपा प्रमुख मायावती ने विधानसभा चुनाव 2022 के लिए अपना फॉर्मूला साफ कर दिया। उन्होंने जिस तरह से दलितों के साथ साथ ब्राह्मणों और मुस्लिमों पर बात की, उसने स्पष्ट कर दिया कि वे वर्ष 2007 की सोशल इंजीनियरिंग की तरफ लौट रही हैं। उनकी बीएमडी (ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित) व पिछड़ा व अन्य पिछड़ा वर्ग गठजोड़ से ही चुनावी वैतरणी को पार करने की योजना है।

BSP Suprimo Mayawati,Satish chandra mishra ,Bhim Rajbhar on stage

दिग्गजों के बिना भी भीड़ देखकर बसपाई गदगद 2022 में सरकार बना सकती है बसपा

बसपा में इस समय दिग्गजों का अभाव मान रहे विपक्षियों को साफ सन्देश भी दिया है। बसपाई सिपहसालार लगातार बसपा को छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं लेकिन बसपा से जाने बाले सिर्फ खुद जाते हैं उनके साथ बसपा का वोट बैंक कभी नहीं जाता है। , पर इस रैली में उमड़ी भीड़ से बसपा में जबरदस्त उत्साह है। को-ऑर्डिनेटरों तथा संगठन के लोगों ने जो भीड़ जुटाई उससे बसपाई खुश हैं। मायावती ने भी इस भीड़ के जरिए विपक्षियों पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

Farrukhabad Bsp Workers

मुस्लिमों को जोड़ने की रणनीति का भी दिखा असर

बसपाई रणनीतिकारों ने अपने मुस्लिम नेताओं के जरिए एक मंत्र फूंका है जिसका असर रैली में भी देखने को मिला। मुस्लिमों से कहा जा रहा है कि जो सपा अपने सांसद आजम खां तक को नहीं बचा सकी वह आम मुस्लिमों के हितों की रक्षा कैसे करेगी। रैली में आए मुस्लिम भी इसी को दोहराते दिखे। मुस्लिमों का सपा के प्रति रुझान देखकर बसपा इसकी काट ढूंढ़ रही है।

सोशल इंजीनिरिंग के फॉर्मूले पर काम कर 2007 का परिणाम दोहरा सकती है बसपा

बसपा ने वर्ष 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसके तहत 139 सीटों पर सवर्ण उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इसके बाद के चुनावों में बसपा ने मुस्लिम कार्ड तो खेला पर 2007 जैसी सोशल इंजीनियरिंग न होने से बात नहीं बनी। मायावती यह जानती हैं कि निश्चित रूप से उनके पास दलितों का बड़ा वोट बैंक है, लेकिन सिर्फ उनके सहारे चुनावी वैतरणी पार नहीं हो सकती है। इसलिए उन्होंने सीधा ब्राह्मणों और मुस्लिमों पर फोकस किया है।

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