प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत मौजा बराकेशव में विगत कई वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों व किसानों के अनुसार चकबंदी अधिकारियों की मनमानी चल रही है जिसमें किसानों से चकों को बनाने , किसानों की जमीन को रोड से हटाकर दूसरे लोगों को देने और अवैध धन उगाही कर अधिकारी गण मनमानी कर रहे हैं ऐसा आरोप किसान यूनियन के लिजाध्यक्ष अजय कटियार ने लगाया है।अजय कटियार पिछले कई सालों से बराकेशव की चकबंदी अधिकारियों की कारगुज़ारी पर नजर बनाए हुए हैं।और किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
चकबंदी निरस्तीकरण के लिए सरकार की गाइडलाइन का नहीं हो रहा पालन
किसान यूनियन जिलाध्यक्ष ने अपने दिए वक्तव्य में यह भी कहा कि सरकार की मंशा के अनुसार अगर किसी मौजा की चकबंदी होनी है तो वहां के पचहत्तर प्रतिशत किसानों को सहमत होना जरूरी है। मगर इस बराकेशव मौजा में एक बार वोटिंग प्रक्रिया को लागू किया जा चुका है।जिसमें लगभग पचासी प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी चकबंदी को नकार दिया था। फिर भी किसानों पर अनावश्यक तरीके जमीनों की पैमाईश करने लगते हैं।
पिछले पांच साल से हो रहा चकबंदी निरस्तीकरण के लिए आंदोलन, धरना प्रदर्शन नहीं खुल रही अधिकारियों की नींद
बराकेशव मौजा से लेकर फर्रुखाबाद चकबंदी के उच्चाधिकारियों , उपजिलाधिकारी ,एडीएम, व जिला अधिकारी ऑफिस तक के चक्कर सालों से लगा रहे हैं। भ्रष्टाचार, धनउगाही गरीब किसानों की गले की फांस बनी हुई है।लेकिन ऐसा लग रहा है। जैसे प्रशाशन ने चकबंदी अधिकारियों को लूट खसोट करने की खुली छूट दे रखी है। और किसान दर दर भटक रहे हैं। कई शिकायतें होने के बावजूद कोई पाबंदी नहीं लग पा रही है।और चकबंदी अधिकारी लगातार अपनी मनमानी कर रहे है।


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